सुने तो लगता है 'योग' एक परम एक आचार संहिता, एक ऐसा तत्व है जिसे 'योग' एक आसन या योग मुद्राओं सत्य है जो हमें प्रकृति से सामंजस्य जीवित रहने के लिए किसी भी प्रकरण के का संयोजन ही नहीं अपितु अपने करने की प्रेरणा देता है। विद्वानों ने इसका साथ जोड़ा जा सकता है। चाहे वो उठना । ' आप में एक वृहद ग्रंथ है जिसमें नाना प्रकार से किया है। किसी ने उसे हो, बैठना हो, लेटना, सोना, चलना, फिरना, संस्कृत धातु 'युग' से उत्पन्न माना है जिसका खाना-पीना. पढ़ना-लिखना, व्यायाम करना. जीवन के हर प्रश्न का हल है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा की शुद्धि, आध्यात्म से जोडना-जीवन की हर क्रिया
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